सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े जमीन के बदले नौकरी के मामले में सीबीआई की प्राथमिकी को सोमवार को रद्द करने से इनकार कर दिया.यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने आया. बेंच ने इस स्टेज पर दखल देने में अपनी अनिच्छा जताई, और यादव को ट्रायल के दौरान पहले से मंज़ूरी का मुद्दा उठाने की आज़ादी दी.बेंच ने कहा कि उसके सामने उठाए गए मुद्दे हैं, पहला, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 17A का दायरा और प्रयोज्यता, और दूसरा,उसी प्रावधान का भावी अनुप्रयोग और संचालन.बेंच ने अपने आदेश में कहा, “तथ्यों और हालात को ध्यान में रखते हुए, याचिकाकर्ता को पेश होने से छूट दी जाती है…. याचिकाकर्ता को ट्रायल के समय कानूनी मुद्दा उठाने की भी आज़ादी दी जाती है.”सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे कानूनी सवालों के पेंडिंग रहने से ट्रायल की प्रगति नहीं रुक सकती. यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बेंच के सामने दलील दी कि पहले से मंज़ूरी न होने से जांच ही खराब हो गई.सिब्बल ने कहा कि फाइनल चार्जशीट फाइल की गई थी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 19 के तहत संज्ञान फरवरी, 2025 में लिया गया था, जिसके बाद सेक्शन 17A से जुड़ा मुद्दा तुरंत उठाया गया था.यह तर्क दिया गया कि रेलवे में नियुक्तियों को प्रभावित करने के आरोप मूल रूप से यादव के रेल मंत्री के रूप में आधिकारिक कार्यों से जुड़े थे, और यह धारा 17ए के तहत सुरक्षा को आकर्षित करता है.
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